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 Safalta Ki Kunji: चाणक्य की चाणक्य नीति कहती है कि व्यक्ति को सफलता तभी मिलती है जब वह अपने सभी कार्यों को पूरे परिश्रम और ईमानदारी से करता है. वहीं गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को परिश्रम का महत्व बताया है. ग्रंथ और संत भी यही मानते हैं कि किसी भी कार्य में सफल होने के लिए पहली और आवश्यक तत्व परिश्रम है.


जॉब और बिजनेस में सफल होने के लिए हर कोई प्रयास करता है. लेकिन इन दोनों ही क्षेत्रों में सफलता बहुत कम लोगों को ही मिल पाती है. आप भी यदि सफल होना चाहते हैं तो कुछ बातों को अपने जीवन में उतार लें.

सफलता की कुंजी: जॉब और बिजनेस में सफलता दिलाती हैं ये बातें, जो नहीं जानते हैं वे उठाते हैं नुकसान
सफलता की कुंजी: जॉब और बिजनेस में सफलता दिलाती हैं ये बातें, जो नहीं जानते हैं वे उठाते हैं नुकसान

समय का महत्व पहचानें

चाणक्य के अनुसार जो व्यक्ति समय की अहमियत को नहीं जानते हैं. वे भविष्य में भंयकर कष्टों से जुझते हैं. भविष्य में कष्ट और संकटों का सामना न करना पड़े इसके लिए हर व्यक्ति को समय की कीमत जाननी चाहिए. क्योंकि विद्वानों का ऐसा मानना है कि जो वक्त गुजर जाता है, वह फिर दोबारा लौटकर नहीं आता है. इसलिए जॉब और बिजनेस में समय का विशेष महत्व है. जो समय को मोल जानते हैं वे हर अवसर का बेहतर ढंग से उपयोग करते हैं.


लक्ष्य को पाने के लिए निरंतर प्रयास करें

स्वामी विवेकानंद के अनुसार व्यक्ति को अपने लक्ष्य को लेकर अत्यंत गंभीर रहना चाहिए. व्यक्ति को यदि सफल होना है तो सबसे पहले अपने लक्ष्य को तय करें, लक्ष्य को तय करने के बाद इस पाने के लिए जुट जाना चाहिए. विद्वान मानते हैं कि लक्ष्य को पूरा किए बिना व्यक्ति रूकना नहीं चाहिए. जो हिम्मत हार जाते हैं वे कभी भी जॉब और बिजनेस में सफल नहीं हो सकते हैं.


गलत आदत और संगत से दूर रहें

मनुष्य को कभी कभी गलत आदत और बुरी संगत के कारण नुकसान उठाना पड़ता है. जॉब, शिक्षा, करियर और व्यापार में भी इन बातों का ध्यान रखना चाहिए. जब आप एक जिम्मेदारी को निभांत हैं तो वहां पर गलतियां करने की संभावना बहुत कम होनी चाहिए. गलत आदत और बुरी संगत परिणाम को प्रभावित करती हैं, इसलिए इनसे दूर ही रहें.

 आचार्य चाणक्य ने जीवन के अलग-अलग पहलूओं के बारे में अपनी चाणक्य नीति में लिखा है. उन्होंने अपनी चाणक्य नीति में धन, स्वास्थ्य, तरक्की, विजनेस और मित्रता संबंधी कई बातें कही हैं. आज हम आपको इस स्टोरी में वह बातें बताने जा रहे हैं जो चाणक्य नीति के अनुसार किसी से कभी नहीं कहनी चाहिए, चाहे आप कितने ही दुख में क्यों न हो.

Chanakya Niti: भूलकर भी किसी से नहीं बतानी चाहिए ये 5 बातें, जानिए आज की चाणक्य नीति
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कौन सी बातें किसी को कभी नहीं बतानी चाहिए

चाणक्य कहते हैं कि कुछ बातें ऐसी होती हैं जो किसी और से नहीं कहनी चाहिए. धन का नुकसान होने पर, पत्नी के गलत व्यवहार पर, मन में किसी बात के लिए दुखी होने पर, किसी नीच व्यक्ति के कुछ गलत या घटिया बातें सुन लेने पर. चाणक्य कहते हैं कि ये कुछ ऐसी बातें हैं जिन्हें दूसरों को नहीं बताना चाहिए.


क्यों नहीं कहनी चाहिए ये बातें

चाणक्य का मानना है कि इन बातों को सुनकर लोग आपका मजाक बनाएंगे. ऐसे में आपको उनसे सहानुभूति न मिलने पर आपको और अधिक दुख होगा. चाणक्य कहते हैं कि आपको अपनी निजी बातों को गुप्त ही रखना चाहिए.


इसी बात को इंगित करना चाणक्य का एक श्लोक है

अर्थनाश मनस्तापं गृहिण्याश्चरितानि च।

नीचं वाक्यं चापमानं मतिमान्न प्रकाशयेत॥

 Safalta Ki Kunji: चाणक्य की चाणक्य नीति, गीता का उपदेश और विद्वानों की बात का सार यही है कि सफल व्यक्ति वही है जो अपने पुराने समय को याद रखता है. भूतकाल में किए गए परिश्रम से वर्तमान की नींव तैयार होती है और वर्तमान में अर्जित परिश्रम से भविष्य के दरवाजे खुलते हैं. लेकिन जो लोग सफल होने पर अपना भूतकाल भूला देते हैं वे भविष्य में अपनी मुश्किलों को बढ़ा लेते हैं.

संतों का मत है कि सफल होना उतना मुश्किल कार्य नहीं है जितना सफलता को बनाए रखना. जीवन में हर व्यक्ति सफल होना चाहिए. सफल होने के लिए व्यक्ति कठोर परिश्रम करता है. दिन रात, हर मौसम को सहन कर व्यक्ति, सफल होने के लिए अपने लक्ष्य के प्रति सर्मिपत रहता है.

गीता में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन से कहते हैं कि सफल व्यक्ति को गंभीर होना चाहिए. गंभीरता व्यक्ति को सक्षम और कुछ बेहतर करने के लिए प्रेरित करती है. जो व्यक्ति सफल होने के बाद अहंकार में डूब जाते हैं, दूसरों को अपनी सफलता का अहसास कराते हैं, सामने वाले व्यक्ति को कमतर आंकते हैं ऐसे लोगों के पास सफलता अधिक दिनों तक नहीं टिकती है. ऐसे लोगों के पास अज्ञात शत्रुओं की कोई कमी नहीं होती है.

सफलता को कायम रखना है तो शत्रुओं की संख्या को कम करके रखना चाहिए. शत्रु कम होने पर आपकी सफलता की सीमा अधिक रहती है.

सफलता की कुंजी: सफलता मिलने पर इन 3 बातों को कभी नहीं भूलना चाहिए, आप भी जानें
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दूसरों का सम्मान करें

सफलता मिलने के बाद कुछ लोगों को अहंकार आ जाता है और इसी अहंकार में दूसरों के सम्मान को भूल जाते हैं. ऐसा नहीं करना चाहिए. ये गलत आदत है.


मानव कल्याण के लिए कार्य करें

सफल व्यक्ति को मानव हित के लिए कार्य करने चाहिए. जो व्यक्ति अपनी ही तरह दूसरे व्यक्तियों को सफल बनाने के लिए प्रयास करता है, समाज ऐसे लोगों का अनुशरण करता है.


वाणी में मधुरता लाएं

सफल व्यक्ति को अपने बर्ताव में विनम्रता और वाणी में मधुरता रखनी चाहिए. जिसके पास ये दोनों ही चीजें है, वह सभी के हृदय का प्रिय होता है.

 Chanakya Niti Hindi: चाणक्य एक शिक्षक होने के साथ विभिन्न विषयों के विशेषज्ञ भी थे. आचार्य चाणक्य की गिनती देश के श्रेष्ठ विद्वानों में की जाती है. चाणक्य को अर्थशास्त्र, राजनीति शास्त्र, कूटनीति शास्त्र और समाज शास्त्र जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों के मर्मज्ञ थे.

चाणक्य के अनुसार व्यक्ति की पहचान उसके कर्मों से बनती है. इसीलिए कर्म को प्रधानता दी गई है. कर्म के क्षेत्र के व्यक्ति सफलता प्राप्त करने के लिए कठोर परिश्रम करता है. लेकिन कभी कभी वो इस क्षेत्र में सफल नहीं हो पाता है. आज भी हर व्यक्ति की इच्छा होत है कि जॉब और करियर में उसे सफलता प्राप्त हो लेकिन ये इतना आसान नहीं होता है. इसलिए चाणक्य ने कुछ बातें बताई हैं जिन्हें ध्यान में रखना चाहिए-

Chanakya Niti: चाणक्य की ये तीन बातें जॉब और करियर में सफलता दिलाती हैं, जानें चाणक्य नीति
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जीवन में चुनौतियों का मुकाबला करें

चाणक्य के अनुसार व्यक्ति के जीवन में उतार चढ़ाव आते रहते हैं. व्यापार, कर्म के मामले में भी यही बात लागू होती है. जिस प्रकार से हाथ की सभी अंगुली समान नहीं होती हैं उसी तरह से जॉब और करियर में भी हर दिन एक जैसे नहीं होते हैं इनमें भी उतार चढ़ाव की स्थिति बनी रहती है, लेकिन गिरावट आने पर घबराना नहीं चाहिए, बल्कि उनका मुकाबला करना चाहिए. क्योंकि बुरा वक्त हर किसी के जीवन में आता है. लेकिन जो बुरे दौर में हिम्मत नहीं हारते हैं और विपरीत परिस्थितियों का डटकर मुकाबला करते हैं, वे लोग जीवन में बहुत सफलता प्राप्त करते हैं.


प्रतिद्वंदियों पर नजर रखें

चाणक्य के अनुसार हर जगह पर व्यक्ति के प्रतिद्वंदी होते हैं. प्रतिद्वंदी को नकारात्मक नजर नहीं देखना चाहिए, प्रतिद्वंदी आपको आगे बढ़ने और सफल होने के लिए प्रेरित करते हैं. प्रतिद्वंदियों की योजनाओं की जानकारी रखें और उन्हें कभी कमतर नहीं आंके, जब आप बड़े कार्य में लिप्त हों तो अपनी योजनाओं को गुप्त रखें. ऐसा करने से आपके सफल होने की संभावना बनी रहेगी.


साथ देने वालों का सदैव सम्मान करें

चाणक्य के अनुसार जीवन के किसी भी क्षेत्र में यदि आपको सफल होना है तो साथ देने वालों का सदैव सम्मान करो. जो लोग अपने सहयोगियों का सम्मान नहीं करते हैं वे जीवन में बुरा वक्त आने पर अकेले रह जाते हैं.

 Safalta Ki Kunji: चाणक्य की चाणक्य नीति कहती है कि धन का संचय व्यक्ति को मुसीबतों से बचाता है. जो व्यक्ति धन का संचय नहीं करते हैं और बेमतलब धन को खर्च करते हैं वे मुसीबत के समय दुखी और परेशान होते हैं.

मानव जीवन की तीन मुख्य बातों को समझने की जरूरत है. जिसमें तन, मन और धन को शामिल किया गया है. तन से अर्थ है सेहत. स्वस्थ्य शरीर को पूंजी के समान माना गया है. वहीं किसी भी कार्य करने के लिए सबसे जरूरी चीज है मन, यदि मन नहीं तो कोई भी कार्य न करें, उसमें सुख और सफलता नहीं मिलती है. तीसरी चीजे हैं धन. धन के बिना किसी भी प्रकार के सुखों की बात करना बेमानी लगती है. भौतिक युग में धन को विशेष महत्व प्राप्त है. धन व्यक्ति के खराब समय में सच्चे मित्र की भूमिका निभाता है. इसलिए धन की उपयोगिता को समझना बहुत ही जरूरी है.

सफलता की कुंजी: धन कमाने से भी महत्वपूर्ण होता है धन का सही उपयोग, जों नहीं जानते हैं वे उठाते हैं परेशानी
सफलता की कुंजी: धन कमाने से भी महत्वपूर्ण होता है धन का सही उपयोग, जों नहीं जानते हैं वे उठाते हैं परेशानी

गीता के उपदेश में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन के माध्यम से मानव जाति को जीवन जीने की कला को बताते हैं. गीता के वचन व्यक्ति को मोक्ष का मार्ग दिखाते हैं.

आज के दौर में जीवन जीने के लिए जिन महत्वपूर्ण चीजों की जरूरत पड़ती है, उसमे एक धन भी है. लेकिन कई लोग धन का सही उपयोग नहीं कर पाते हैं, जिस कारण धन उनके लिए चुनौती और परेशानी का कारण बन जाता है.

ध्यान रहे गलत ढंग से प्राप्त किया गया धन, कई प्रकार के रोग, अवगुण और शत्रुता भी लाता है. इसलिए धन के मामले में इन बातों का ध्यान रखना चाहिए.

चाणक्य के अनुसान धन बुरे वक्त में व्यक्ति का सबसे अच्छा मित्र है. जब व्यक्ति का बुरा समय आता है तो सगे संबंधी भी साथ छोड़ देते हैं तब धन ही व्यक्ति की मदद करता है, और समझदार व्यक्ति पुन: अपनी स्थिति को प्राप्त करता है. धन का उपयोग बहुत सोच समझकर करना चाहिए. धन का संचय करना चाहिए. जो लोग धन की बचत नहीं करते हैं, वे जरूरत आने पर संकटों से घिर जाते हैं. धन का सम्मान करो, मानव हित के कार्यों में धन का प्रयोग करना चाहिए. ऐसा करने वाले व्यक्ति ही सम्मान प्राप्त करते हैं.

 Chanakya Niti Hindi: चाणक्य के अनुसार धन के अभाव में व्यक्ति को संघर्ष और कष्टों का सामना पड़ता है. इसलिए धन की चाहत में व्यक्ति को सात समंदर पार भी जाना पड़ता है. चाणक्य के मुताबिक धन को प्राप्त करने के लिए व्यक्ति को जोखिम उठाने के लिए सदैव तैयार रहना चाहिए.

चाणक्य की चाणक्य नीति कहती है कि धन को प्राप्त करना है तो कुछ बातों को अमल में जरूर लाएं. धन परिश्रम और प्रतिभा से आता है. जिस व्यक्ति में ये दोनों ही चीजें है उसे धन की देवी लक्ष्मी का आर्शीवाद प्राप्त होता है. चाणक्य के अनुसार धन की देवी लक्ष्मी का यदि जीवन में आर्शीवाद चाहिए तो इन बातों को हमेशा याद रखना चाहिए.

Chanakya Niti: चाणक्य की ये बातें व्यक्ति बनाती हैं करोड़पति, जानें चाणक्य नीति
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परिश्रम करने के लिए सदैव तैयार रहें

चाणक्य के अनुसार जो व्यक्ति परिश्रम करने के लिए सदैव तैयार रहता है उस पर लक्ष्मी जी की कृपा बनी रहती है. परिश्रम करने वाले कभी असफल नहीं होते हैं. धन के मामले में ऐसे व्यक्ति बहुत जल्द सफलता प्राप्त करते हैं. इसलिए करोड़पति बनना है तो कठोर परिश्रम के लिए अपने आप को हमेशा तैयार रखना चाहिए.


योजना बनाकर लक्ष्य को प्राप्त करें

चाणक्य के अनुसार यदि धनवान बनना है तो व्यक्ति को हर कार्य को योजनाबद्ध तरीके से कराना चाहिए. बड़े लक्ष्य को पाना है तो रणनीति बनाकर कार्य करें. ऐसा करने से सफल होने की संभावना बढ़ जाती है. जो लोग अपने लक्ष्य को पाने के लिए योजना नहीं बनाते हैं वे हमेशा अपने लक्ष्य से दूर रहते हैं.


सफल होने से पहले न करें योजना का खुलासा

चाणक्य के अनुसार व्यक्ति को अपनी महत्वपूर्ण योजनाओं को गुप्त रखना चाहिए. जब तक व्यक्ति अपने मकसद में सफल न हो जाए तब तक अपनी किसी भी योजना का खुलासा नहीं करना चाहिए. ऐसा करने से प्रतिद्वंदी सर्तक हो जाते हैं और समय आने पर हानि भी पहुंचा सकते हैं. इसलिए पैसा वाला यदि बनना है तो अपनी योजनाओं के बारे में तभी बताएं जब आप सफल हो जाएं.


सहयोगियों का सम्मान करें

चाणक्य के अनुसार जीवन में धनवान वही बनता है जो अपने सहयोगियों का पूरा सम्मान करता है. कोई भी व्यक्ति अकेले कोई भी बड़ा कार्य नहीं कर सकता है, उसे कुछ सहयोगियों की जरूरत पड़ती ही है, इसलिए अपने संघर्ष के सहयोगियों को कभी भी नहीं भूलना चाहिए.

 Safalta Ki Kunji: चाणक्य की चाणक्य नीति कहती है कि जिसे लक्ष्मी जी का आर्शीवाद प्राप्त है उसका जीवन से परेशानियां कोसों दूर रहती हैं. लेकिन लक्ष्मी जी का आर्शीवाद प्राप्त करना इतना आसान नहीं है. लक्ष्मी जी उसी व्यक्ति को अपना आर्शीवाद प्रदान करती हैं जिसमें कुछ विशेषताएं हों. ये विशेषताएं कोई भी व्यक्ति अपने भीतर विकसित कर सकता है. जो इन विशेषताओं को अपने भीतर विकसित कर लेता है उसका जीवन लक्ष्मी जी सुख सुविधाओं से पूर्ण बना देती हैं.

पौराणिक कथाओं के अनुसार लक्ष्मी जी उसी व्यक्ति को अपना आर्शीवाद प्रदान करती है, जों अनुशासन, कठोर परिश्रम और परोपकार की भावना रखता है. वहीं ऐसे लोगों को लक्ष्मी जी बिल्कूल भी पसंद नहीं करती हैं.

सफलता की कुंजी: ऐसे लोगों को लक्ष्मी जी नहीं करती हैं पसंद, नहीं करना चाहिए ये गलत काम
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स्वच्छता के नियमों को न मानने वालों से दूर रहती हैं लक्ष्मी जी

पौराणिक ग्रंथों के अनुसार लक्ष्मी जी उस स्थान और व्यक्ति के पास जाना पसंद नहीं करती हैं जो साफ सफाई पर ध्यान नहीं देता है. गंदी भाषा, गंदा स्थान, गंदे विचार आदि से लक्ष्मी जी बहुत दूर रहती है. इसीलिए व्यक्ति को सदैव स्वच्छ रहना चाहिए, साफ वस्त्र धारण करने चाहिए, अच्छे विचार और अच्छा आचरण रखना चाहिए.


गलत संगत से दूर रहें

लक्ष्मी जी उन लोगों को अपना आर्शीवाद नहीं देती हैं जिनकी संगत गलत होती हैं. धर्म ग्रंथ और महापुरूषों की वाणी भी यही कहती है कि व्यक्ति को सदैव अच्छी संगत में बैठना चाहिए अच्छी संगत से अच्छे विचार मन में आते हैं. जो लोग गलत संगत में बैठते हैं वे एक दिन हानि उठाते हैं, ऐसे लोगों को सम्मान भी प्राप्त नहीं होता है.


दूसरों के प्रति प्रेम का भाव रखो

लक्ष्मी जी उस व्यक्ति को अपना आर्शीवाद जरूर देती है जो मानव कल्याण के बारे में सोचते हैं और प्रयास करते हैं. दूसरों के प्रति प्रेम भाव रखने वालों को कभी कष्ट नहीं देती हैं. ऐसे लोगों को समाज में बहुत सम्मान प्राप्त होता है. गीता का उपदेश भी प्रेम के महत्त्व को बताता है. प्रेम सभी प्रकार के सुखों का कारक है.


कमजोर को कभी न सताएं

कमजोर व्यक्ति को जो व्यक्ति परेशान करता है और सताता था उसे लक्ष्मी जी बहुत जल्दी त्याग देती हैं. ऐसे लोगो कठोर दंड पाते हैं.

 Jivan Mantra : आज के भागमभाग वाली जिंदगी में रोज ब रोज हमारे सामने एक न एक परेशानी आती ही रहती है. इन परेशानियों की वजह से कभी-कभी हमारा पूरा जीवन ही प्रभावित हो जाता है. पर वहीँ अगर हम कुछ आसान उपायों को कर लेते हैं तो न केवल हम उन परेशनियों को दूर कर लेते हैं बल्कि उन परेशनियों की वजह से हम अपने जीवन को प्रभावित होने से बचा भी सकते हैं. जैसे-

Jivan Mantra: ये हैं जीवन की हर परेशानी दूर करने के सबसे आसान उपाय, जानें विस्तार से
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सभी परेशानियों / कष्टों को ख़त्म करने के लिए- यदि आपको सभी तरफ से केवल कष्ट ही कष्ट मिल रहा है तो इन कष्टों को ख़त्म करने के लिए हर सोमवार को किसी शिव मंदिर में जाकर कच्चे दूध से शिवलिंग पर अभिषेक करना चाहिए. ऐसा करने से भगवान भोलेनाथ आपकी हर मनोकामना पूरी करेंगे और जीवन की सभी परेशानियां भी ख़त्म हो जाएंगी.

जल्द धनवान बनने के लिए बुधवार को करें यह उपाय- यदि आप जल्द से जल्द धनवान बनना चाहते हैं तो इसके लिए आपको 7 साबुत कौड़ियों को एक मुट्ठी हरे मूंग के साथ लेकर उसे हरे कपड़े में बांध लेना चाहिए. इसके बाद बुधवार के दिन बिना किसी को बताए चुपचाप इस पोटली को किसी मंदिर की सीढ़ियों पर रख देना चाहिए. यह उपाय कम समय में धनवान बनने या आकस्मिक धन पाने की इच्छा रखने वाले को जरूर करना चाहिए.

नकारात्मक ऊर्जा को ख़त्म करने के लिए रविवार को करें यह उपाय- यदि  कोई नकारात्मक ऊर्जा से परेशान है तो उसे रविवार की रात में एक गिलास गाय का दूध अपने सिरहाने रखकर सोना चाहिए. इस दूध को सुबह उठकर स्नान आदि करके बबूल के पेड़ की जड़ में डाल देना चाहिए. ऐसा करने से नकारात्मक ऊर्जा ख़त्म होने लगती है और आदमी को सभी कामों में सफलता भी मिलने लगती है.

आर्थिक परेशानी दूर करने के लिए करें यह उपाय- यदि आप आर्थिक परेशानी में हैं तो इसके लिए आपको सोमवार की रात में चंद्रोदय होने के बाद चार चांदी की कील को अपने पलंग के चारों कोनों पर ठोंक देना चाहिए. ऐसा करने से आपकी आर्थिक परेशानी धीरे-धीरे समाप्त हो जाएगी.

 Chanakya Niti Hindi: चाणक्य के अनुसार पति और पत्नी के रिश्ते को कभी कमजोर नहीं होने देना चाहिए. ये रिश्ता जितन अधिक मजबूत होगा जीवन में सुख उतना ही अधिक और परेशानी कम से कम होगी. पति और पत्नी का रिश्ता कमजोर होने से जीवन में कई तरह की परेशानियां लेकर आता है. यह रिश्ता जब कमजोर होता है तो तनाव, क्लेश और आत्म विश्वास में कमी लाता है. चाणक्य के अनुसार व्यक्ति कितना ही प्रतिभाशाली क्यों न हो, यदि उसका दांपत्य जीवन खुशहाल नहीं है तो ऐसा व्यक्ति कभी भी अपनी प्रतिभा का सही उपयोग नहीं कर पाता है.

Chanakya Niti : जीवन में सुख ज्यादा और परेशानी कम चाहते हैं तो पति-पत्नी के रिश्ते को मजबूत बनाएं
Chanakya Niti : जीवन में सुख ज्यादा और परेशानी कम चाहते हैं तो पति-पत्नी के रिश्ते को मजबूत बनाएं

चाणक्य के अनुसार पति और पत्नी को रिश्ते को मजबूत बनाने के लिए कुछ बातों का हमेशा ध्यान रखना चाहिए, ये बातें दांपत्य जीवन में मधुरता लाती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि का कारक बनती हैं-

एक दूसरे को भरपूर समय दें

चाणक्य के अनुसार पति और पत्नी को आपस में अच्छा समय व्यतीत करने का प्रयास करना चाहिए. एक दूसरे को भरपूर समय देना चाहिए. ऐसा करने से रिश्ते को मजबूती मिलती है. वहीं ऐसा करने से निकटता बढ़ती है. जो इस रिश्ते के लिए एक जरूरी चीज है. इसलिए जब भी समय बीताने का अवसर मिले तो इसका उपयोग करना चाहिए.

हर समस्या का मिलकर मुकाबला करें

चाणक्य के अनुसार हर व्यक्ति के जीवन में उतार चढ़ाव आता है. समस्याएं हर किसी के जीवन में आती हैं. लेकिन यदि इन समस्याओं का मिलकर मुकाबला किया जाए तो बड़ी से बड़ी समस्या भी छोटी लगने लगती है. इसीलिए विपत्ति आने पर पति और पत्नी को मिलकर इसका मुकाबला करना चाहिए.

एक दूसरे सम्मान करें

चाणक्य के अनुसार पति और पत्नी को एक दूसरे की भावनाओं का आदर करना चाहिए और एक दूसरे का पूरा सम्मान करना चाहिए. जो इन बातों का ध्यान रखते हैं उनका दांपत्य जीवन सदैव खुशहाल रहता है. पति और पत्नी के रिश्ते में मधुरता बनी रहती है.

 Chanakya Niti: आचार्य चाणक्य की शिक्षाओं में जीवन की सभी समस्याओं का हल मिलता है. यही कारण है कि सदियां बीत जाने के बाद भी उनकी शिक्षाएं प्रासंगिक बनी हई हैं. भारत के श्रेष्ठ विद्वानों में एक आचार्य चाणक्य के अनुसार जीवन में सुख, शांति, समृद्धि की खोज तो सभी करते हैं लेकिन कुछ ही लोगों को ये तीनों चीजें मिलती हैं. आचार्य चाणक्य के मुताबिक कुछ विशेष गुण ही मनुष के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि ला सकते हैं. जानते हैं वे विशेष गुण कौन से हैं.

Chanakya Niti: चाणक्य के अनुसार ये तीन बातें आपके जीवन में भर देंगी खुशियां, जानें चाणक्य नीति
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लालच का त्याग करें

चाणक्य के अनुसार लालच एक ऐसी बुरी आदत है जो व्यक्ति को सुख और शांति से दूर रखती है. लालच व्यक्ति को चैन से सोने नहीं देता है, व्यक्ति सदैव ही दूसरों की सफलता से जलता रहता है. मन में बुरे विचार लाता है और अपनी ऊर्जा को नष्ट करता है. जिस कारण व्यक्ति चाह कर भी परिश्रम नहीं कर पाता है और असफलता मिलने पर तनाव और नकारात्मक ऊर्जा से घिर जाता है. इसलिए जीवन में सुख और शांति चाहते हैं तो लालच से दूर ही रहें.

दूसरों को क्षमा करें

चाणक्य के अनुसार जो व्यक्ति जीवन में क्षमा करना सीख जाता है वह सभी प्रकार के दुखों से मुक्ति पा लेता है. क्षमा करना एक श्रेष्ठ गुण है. क्षमा करने से व्यक्ति महान बनता है और दूसरों के लिए प्रेरणा का काम करता है. क्षमा करने से शांति मिलती है.

निंदा रस से दूर रहें

चाणक्य के अनुसार व्यक्ति को निंदा रस से दूर ही रहना चाहिए. निंदा करना एक बुरी आदत है. समय रहते यदि इससे दूरी न बनाई जाए तो व्यक्ति को इसमें आनंद आने लगता है और धीरे धीरे वह भी बुराईयों को अपनाने लगता है. निंदारस से जीवन में समृद्धि नहीं आती है. इसलिए इससे दूर ही रहना चाहिए.

 हिंदू धर्म में तीर्थयात्रो का विशेष महत्व है. वेदों और पुराणों में भी तीर्थयात्रा करने का महत्व माना गया है. तीर्थयात्रा का उद्देश्य ईश्वर के करीब रहने की अनुभूति करना और पुण्य प्राप्त करना होता है.

क्या आप जानते हैं कि तीर्थयात्रा के दौरान कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना पड़ता है. इन बातों का पालन करने से तीर्थयात्रा का पूर्ण फल हमें प्राप्त होता है. आइए जानते हैं इनके बारे में...

तीर्थ यात्रा के दौरान इन नियमों का जरूर करें पालन, मिलेगा अधिक पुण्य लाभ
तीर्थ यात्रा के दौरान इन नियमों का जरूर करें पालन, मिलेगा अधिक पुण्य लाभ

तीर्थयात्रा करते समय भूलकर भी झूठ या अपशब्द न बोलें, गलत कार्य न करें. जान लीजिए तीर्थ पर जाने से व्यक्ति के पापकर्म नष्ट होते हैं लेकिन तीर्थयात्रा के दौरान किए गए पापकर्म कभी नष्ट नहीं होते हैं.

तीर्थ यात्रा आत्मिक शांति के लिए की जाती है. इसलिए तीर्थ यात्रा करते वक्त सच्चे मन से ईश्वर का गुणगान करना चाहिए. शांति बनाए रखनी चाहिए जोर-जोर से बोलना नहीं चाहिए.

तीर्थ स्थल पर स्नान, दान, जप आदि पुण्य कर्म जरूर करने चाहिए .

सदा अपने धन से ही तीर्थयात्रा करनी चाहिए. दूसरों के धन से किए गए तीर्थ के पुण्य का सोहलवां भाग प्राप्त होता है.

देवस्थान पर जब आप परिक्रमा कर रहे हो तो भगवान के सामने कुछ देर रूककर परिक्रमा करनी चाहिए.

भगवान का ध्यान करने के बाद ही भोजन करना चाहिए, लेकिन जब आप यात्रा पर हैं तो भगवान के निवेदित किए बिना किसी भी चीज का सेवन न करें.

Safalta Ki Kunji: चाणक्य नीति कहती है कि मित्रता बहुत सोच समझ कर करनी चाहिए. वहीं चाणक्य यह भी कहते हैं कि सच्चे मित्र की पहचान, हमेशा संकट के समय होती है. गीता में भी सच्चे मित्र के बारे में बताया गया है. सभी जानते हैं कि भगवान श्रीकृष्ण और अर्जुन के बीच एक सखा यानि एक मित्र का भी रिश्ता था, जिसे दोनों ने ही बाखूबी निभाया था.

आज के दौर में मित्रता अधिक दिनों तक नहीं चलती है. इसके पीछे क्या कारण है? चाणक्य कहते हैं जो व्यक्ति आपके धन, पद और शक्ति से प्रभावित होकर मित्रता करें, वह मित्रता अधिक दिनों तक नहीं रहती है. ग्रंथों में भी कहा गया है कि पद, धन और शक्ति कभी स्थाई नहीं होती है. ये आते जाते रहते हैं. इसलिए जब व्यक्ति के पास ये तीनों चीजों होती हैं तो कई लोग मित्र बनकर अगल बगल मौजूद रहते हैं, लेकिन जैसे ही ये तीनों चीजें चली जाती हैं, ये लोग भी किनारा कर जाते हैं.

सफलता की कुंजी: दोस्ती अनमोल है, दोस्ती के रिश्ते को मजबूत बनाना है, तो जान लें ये बात
सफलता की कुंजी: दोस्ती अनमोल है, दोस्ती के रिश्ते को मजबूत बनाना है, तो जान लें ये बात

चाणक्य की मानें तो मित्रता करते समय बहुत ही सावधानी बरतनी चाहिए. असली और सच्चा मित्र वही है जो आपके रूतबे से नहीं बल्कि आपके विचारों और व्यवहार से प्रभावित होकर मित्रता करे. इतना ही नहीं सच्चा मित्र सदैव सही और उचित सलाह देता और गलत कार्यों को करने से रोकता है.

संकट के समय कभी न छोड़े साथ

महापुरुषों ने मित्रता के बारे मे कहा कि मित्रता ठीक उसी प्रकार से करनी चाहिए जिस प्रकार से वस्त्र का संबंध मनुष्य से होता है. वस्त्र जीवन भर मनुष्य का तन ढ़कता है और मृत्यु पर कफन बनकर साथ जाता है. इसका अर्थ ये है कि मित्रता में इसी तरह का भाव होना चाहिए. मित्रता में ऐसा समर्पण होता है, वहीं सच्ची प्रीत और मित्रता है.

दोस्ती में इन बातों का रखें ध्यान

दोस्ती तभी गहरी और मजबूत होती है जब उसमें किसी प्रकार का लालच न हो. लालच एक ऐसा रोग है, जो हर रिश्ते को कमजोर करता है. दोस्ती में कभी लालच और जलन की भावना नहीं आनी चाहिए. इससे दोस्ती कमजोर होती है.

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