Gita Jayanti : गीता जयंती पर पढ़ें गीता के ये श्लोक, इनमें छिपा है हर समस्या का हल

 Gita Jayanti 2020: आज 25 दिसंबर को गीता जयंती मनाई जा रही है. आज एकादशी के दिन ही भगवान श्रीकृष्‍ण के श्री मुख से पवित्र श्रीमदभगवद् गीता का जन्‍म हुआ था. इसलिए गीता जयंती मनाई जाती है. भारत की सनातन संस्कृति में श्रीमद्भगवद्गीता न केवल पूज्य बल्कि अनुकरणीय भी है. यह दुनिया का इकलौता ऐसा ग्रंथ है जिसकी जयंती मनाई जाती है. श्रीमद्भगवद्गीता के कई श्लोकों में जीवन का सार छिपा है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब आप किसी परेशानी या समस्या में हों तो गीता का ज्ञान आपको सही मार्गदर्शन दे सकता है. आज हम आपके लिए लेकर आए हैं श्रीमद्भगवद्गीता के कुछ उपदेश और उनका अर्थ...

Gita Jayanti : गीता जयंती पर पढ़ें गीता के ये श्लोक, इनमें छिपा है हर समस्या का हल
Gita Jayanti : गीता जयंती पर पढ़ें गीता के ये श्लोक, इनमें छिपा है हर समस्या का हल


कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन.

मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥

(द्वितीय अध्याय, श्लोक 47)

अर्थ: कर्म पर ही तुम्हारा अधिकार है, कर्म के फलों में कभी नहीं... इसलिए कर्म को फल के लिए मत करो. कर्तव्य-कर्म करने में ही तेरा अधिकार है फलों में कभी नहीं. अतः तू कर्मफल का हेतु भी मत बन और तेरी अकर्मण्यता में भी आसक्ति न हो.


हतो वा प्राप्यसि स्वर्गम्, जित्वा वा भोक्ष्यसे महिम्.

तस्मात् उत्तिष्ठ कौन्तेय युद्धाय कृतनिश्चय:॥

(द्वितीय अध्याय, श्लोक 37)

अर्थ: यदि तुम (अर्जुन) युद्ध में वीरगति को प्राप्त होते हो तो तुम्हें स्वर्ग मिलेगा और यदि विजयी होते हो तो धरती का सुख पा जाओगे... इसलिए उठो, हे कौन्तेय (अर्जुन), और निश्चय करके युद्ध करो.


ध्यायतो विषयान्पुंसः सङ्गस्तेषूपजायते.

सङ्गात्संजायते कामः कामात्क्रोधोऽभिजायते॥

(द्वितीय अध्याय, श्लोक 62)

अर्थ: विषय-वस्तुओं के बारे में सोचते रहने से मनुष्य को उनसे आसक्ति हो जाती है. इससे उनमें कामना यानी इच्छा पैदा होती है और कामनाओं में विघ्न आने से क्रोध की उत्पत्ति होती है. इसलिए कोशिश करें कि विषयाशक्ति से दूर रहते हुए कर्म में लीन रहा जाए.


क्रोधाद्भवति संमोह: संमोहात्स्मृतिविभ्रम:.

स्मृतिभ्रंशाद्बुद्धिनाशो बुद्धिनाशात्प्रणश्यति॥

(द्वितीय अध्याय, श्लोक 63)

अर्थ: क्रोध से मनुष्य की मति-बुदि्ध मारी जाती है यानी मूढ़ हो जाती है, कुंद हो जाती है. इससे स्मृति भ्रमित हो जाती है. स्मृति-भ्रम हो जाने से मनुष्य की बुद्धि नष्ट हो जाती है और बुद्धि का नाश हो जाने पर मनुष्य खुद अपना ही का नाश कर बैठता है.

Gita Jayanti : श्रीमद्भगवद्गीता (Geeta shlok) के कई श्लोकों में जीवन का सार छिपा है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब आप किसी परेशानी या समस्या में

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